जीरे की खेती कैसे करे jire ki kheti kse kre hindi

जीरे की खेती कैसे करे jire ki kheti kse kre hindi

हमारे मसालों में एक विशेष स्थान रखने वाला जीरा ,पेट सम्बंधित रोगों की एक रामबाण ओषधि है जिसकी खेती आज के समय में किसानो के लिए एक आय की खेती के रूप में उभर कर सामने आ रही है आइए तो जाने कैसे करे जीरे की खेती

जीरे की खेती के लिए जलवायु :-

जीरे की खेती के लिए हमे शुरुवात में बीज बुवाई के समय  ठन्डे मोसम की जलवायु की आवश्यकता होती है जो की बाद में बीज के पक जाने के बाद हमे सामान्य गर्म मोसम अनिवार्य होता हैजीरे की

खेती के लिए भूमि :-

जीरे के लिए जीवाश्म युक्त अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती ह

जीरे की खेती के लिए भूमि की तेयारी :-

जीरे की खेती में पहले अच्छी तरह मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई कर  भूमि को भुरभुरी कर लिया जाता है इसके बाद कल्टीवेटर से दो –तीन कल्टीवेटर  चलाते है

किस्मे :

  •    RZ 19
  •    RZ 209
  •     जीसी 1
  •    गुजरात जीरा –4 (जीसी-4)

जीरे की खेती के लिए खाद और उर्वरक :-

जीरे की खेती के लिए खाद और उर्वरक  की मात्रा का निर्धारण भूमि की जाच कर किया जाता है जिसमे हम खेत की मिट्टी में गोबर की खाद को जुताई करने के बाद अच्छी तरह मिला दिया जाता है बाकि अन्य उर्वरक का चुनाव  भूमि के अनुसार करते है

जीरे की बुवाई का सबसे उत्तम समय  नवम्बर और दिसम्बर का माना जाता है

बीज की बुवाई कतारों में  12 से 15 किलो.ग्राम  हेक्टेयर बीज का चुनाव किया जाता है बीजो को बुवाई से पहले अच्छी तरह  बीजोपचार  कर प्रयोग में लाना चाहिए जिसमे हमे  2 ग्राम कार्बेण्डाजिम 50 डब्ल्यू.पी. प्रति किलो बीज के अनुसार हमे ये बीजोपचार करना चाहिए

जीरे की खेती के लिए सिचाई :-

जीरे की फसल में  पहली सिचाई  बुवाई के बाद और दूसरी सिचाई बुवाई करने  के दुसरे सप्ताह बाद करना होता है

इसके बाद सिचाई  भूमि की जाच के अनुसार  15 से 20 दिनों में सिचाई करते रहना चाहिए

जीरे की खेती के लिए निराई –गुड़ाई :

फसल की बुवाई के करीब  एक महीने  बाद  पहली निराई और दूसरी बार 55 दिनों बाद  निराई –गुड़ाई कर खरपतवारो का नष्ट करना अति आवश्यक है

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